शारदीय नवरात्रि भाग 1: प्रस्तावना, नाम का अर्थ, इतिहास और शारदीय नवरात्रि
प्रस्तावना*
भारत में कहावत है - "बारह महीने में तेरह त्योहार।" लेकिन अगर किसी एक त्योहार को शक्ति, भक्ति, संगीत, नृत्य, कला और एकता का महासंगम कहा जाए, तो वह है शारदीय नवरात्रि। यह सिर्फ एक त्योहार नहीं, एक भावना है। पूरे भारत में, कश्मीर से कन्याकुमारी तक, इस त्योहार को अलग-अलग नाम और रूप में मनाया जाता है, पर भाव एक ही है - शक्ति की आराधना।
शारदीय नवरात्रि आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से नवमी तक मनाई जाती है। 'शारदीय' शब्द 'शरद' ऋतु से बना है। शरद ऋतु वर्षा के बाद और सर्दी से पहले आती है। इस समय आकाश साफ, मौसम सुहावना और प्रकृति पूरी तरह खिली हुई होती है। इसलिए यह नवरात्रि सबसे अधिक उत्साह से मनाई जाती है। वर्ष 2026 में शारदीय नवरात्रि 11 अक्टूबर से 20 अक्टूबर तक है, 20 अक्टूबर को दशहरा है।
साल में 4 नवरात्रियां होती हैं - चैत्र, आषाढ़ गुप्त, शारदीय और माघ गुप्त। इनमें शारदीय नवरात्रि को 'महानवरात्रि' कहा जाता है। इसे ही मुख्य नवरात्रि माना जाता है।
*नाम का अर्थ और शास्त्रीय आधार*
नव = नौ, रात्रि = रात। नौ रातें। हमारे शास्त्रों में रात का बहुत महत्व है। दिन में हम सांसारिक काम करते हैं, पर रात आत्म-चिंतन, साधना और विश्राम के लिए होती है। नवरात्रि की 9 रातें साधना के लिए सबसे उत्तम मानी गई हैं।
देवी भागवत पुराण, मार्कंडेय पुराण और कालिका पुराण में नवरात्रि का विस्तृत वर्णन मिलता है। मार्कंडेय पुराण के अंतर्गत दुर्गा सप्तशती में 700 श्लोक हैं, जिनका पाठ नवरात्रि में किया जाता है। इसमें माँ दुर्गा के महिषासुर, शुंभ-निशुंभ, रक्तबीज जैसे राक्षसों का वध करने की कथा है।
*इतिहास - शारदीय नवरात्रि क्यों शुरू हुई?*
*1. रामायण कालीन कथा - सबसे प्रचलित:*
जब भगवान राम लंका पर आक्रमण करने जा रहे थे, तो उन्हें समुद्र पार करना था। उससे पहले उन्होंने माँ शक्ति की आराधना करने का निश्चय किया। यह शरद ऋतु का समय था। परम्परा के अनुसार देवताओं की पूजा चैत्र नवरात्रि में होती है, शरद में नहीं। इसलिए इसे 'अकाल बोधन' कहा गया - अर्थात असमय में शक्ति को जगाना।
राम ने 108 नील कमल माँ को अर्पित करने का संकल्प लिया। माँ ने उनकी परीक्षा लेने के लिए एक कमल छुपा दिया। जब एक कमल कम पड़ा, तो राम ने अपना एक नेत्र निकालकर अर्पित करने का निश्चय किया, क्योंकि उन्हें 'कमल नयन' कहा जाता है। उनकी भक्ति से प्रसन्न होकर माँ प्रकट हुईं और उन्हें विजय का आशीर्वाद दिया। उसके बाद राम ने रावण का वध किया। तभी से शारदीय नवरात्रि मनाई जाने लगी। बंगाल में आज भी दुर्गा पूजा में इस 'अकाल बोधन' की कथा सुनाई जाती है।
*2. महिषासुर वध की कथा:*
महिषासुर ने ब्रह्मा जी से वरदान पाया था कि कोई देवता, मनुष्य या असुर उसे नहीं मार सकता। इस वरदान से अहंकारी होकर उसने स्वर्ग पर अधिकार कर लिया। सभी देवता त्रस्त होकर त्रिदेव - ब्रह्मा, विष्णु, महेश के पास गए। तब तीनों के क्रोध औरà सभी देवताओं के तेज से एक दिव्य शक्ति प्रकट हुई - दुर्गा। सभी देवताओं ने अपने अस्त्र-शस्त्र उन्हें दिए। शिव ने त्रिशूल, विष्णु ने चक्र, इंद्र ने वज्र, वरुण ने शंख दिया। 9 दिनों तक भीषण युद्ध चला और 10वें दिन माँ ने महिषासुर का वध किया। इसलिए नवरात्रि के बाद दशहरा यानी विजयादशमी मनाई जाती है।
*3. वैज्ञानिक इतिहास:*
प्राचीन काल में वर्षा ऋतु में लोग घरों में बंद रहते थे। वर्षा के बाद शरद ऋतु में फसल कट कर आती थी। अनाज घर में आता था, इसलिए लोगों के पास समय और समृद्धि दोनों होते थे। इसलिए इस समय शक्ति की पूजा, मेलों और उत्सवों की परम्परा बनी।
*शारदीय नवरात्रि सबसे बड़ी क्यों है?*
चैत्र नवरात्रि बीज बोने का समय है और शारदीय नवरात्रि फसल काटने का समय है। इसलिए शारदीय नवरात्रि में समृद्धि का भाव अधिक होता है। दूसरा, चैत्र नवरात्रि के बाद गर्मी बहुत तेज हो जाती है, जबकि शारदीय नवरात्रि का मौसम सबसे सुहावना होता है। तीसरा, शारदीय नवरात्रि के 10वें दिन दशहरा और उसके ठीक 20 दिन बाद दीपावली आती है। इसलिए इसे त्योहारों की शुरुआत माना जाता है।