भाग 2: नवदुर्गा के 9 रूपों का विस्तृत वर्णन
चैत्र नवरात्रि के प्रत्येक दिन माँ दुर्गा के एक विशेष रूप की पूजा की जाती है।
*पहला दिन - माँ शैलपुत्री:* यह पर्वतों के राजा हिमालय की पुत्री हैं। इनके एक हाथ में त्रिशूल और दूसरे में कमल है। ये वृषभ पर सवार हैं। शैलपुत्री की पूजा से जीवन में स्थिरता और साहस आता है। इस दिन घटस्थापना की जाती है।
*दूसरा दिन - माँ ब्रह्मचारिणी:* ब्रह्म का अर्थ है तपस्या। इन्होंने हजारों वर्षों तक कठिन तपस्या की थी। इनके एक हाथ में जपमाला और दूसरे में कमंडल है। इनकी पूजा से व्यक्ति में त्याग और संयम की भावना बढ़ती है। छात्रों के लिए यह दिन बहुत शुभ होता है।
*तीसरा दिन - माँ चंद्रघंटा:* इनके माथे पर घंटे के आकार का अर्धचंद्र है। इनके घंटे की ध्वनि से नकारात्मक शक्तियां दूर भागती हैं। इनकी पूजा से शांति और वीरता मिलती है।
*चौथा दिन - माँ कूष्मांडा:* मान्यता है कि इन्होंने ही अपनी मंद मुस्कान से ब्रह्मांड की रचना की थी। इनकी पूजा से स्वास्थ्य अच्छा रहता है और आयु बढ़ती है।
*पांचवा दिन - माँ स्कंदमाता:* यह भगवान कार्तिकेय यानी स्कंद की माता हैं। ये कमल के फूल पर बैठी हैं। संतान प्राप्ति की इच्छा रखने वालों के लिए इस दिन की पूजा बहुत फलदायी मानी जाती है।
*छठा दिन - माँ कात्यायनी:* महर्षि कात्यायन ने इनकी कठिन तपस्या की थी, इसलिए इनका नाम कात्यायनी पड़ा। इन्होंने ही महिषासुर का वध किया था। इनकी पूजा से विवाह में आ रही बाधाएं दूर होती हैं।
*सातवां दिन - माँ कालरात्रि:* इनका रूप बहुत ही उग्र है। इनका रंग काला है और ये गधे पर सवार हैं। लेकिन ये हमेशा शुभ फल देती हैं, इसलिए इन्हें शुभंकरी भी कहा जाता है। इनकी पूजा से सभी प्रकार के भय दूर होते हैं।
*आठवां दिन - माँ महागौरी:* इनका रंग गौरा और चमकदार है। कठोर तपस्या के कारण इनका शरीर काला पड़ गया था, तब शिवजी ने इन्हें गंगाजल से धोकर गौर वर्ण दिया। इनकी पूजा से पाप धुल जाते हैं। इसी दिन महा अष्टमी और कन्या पूजन होता है।
*नौवां दिन - माँ सिद्धिदात्री:* ये सभी प्रकार की सिद्धियों को देने वाली हैं। इनके पास आठ सिद्धियां हैं। इनकी पूजा से व्यक्ति को ज्ञान, बुद्धि और सभी इच्छाओं की पूर्ति होती है। इसी दिन राम नवमी भी मनाई जाती है।