Bhag 1 navratron ka mahatva
*प्रस्तावना*
भारत पर्वों का देश है। यहाँ हर महीने, हर ऋतु में कोई न कोई त्योहार मनाया जाता है। ये त्योहार केवल खुशी मनाने के अवसर नहीं हैं, बल्कि हमारी संस्कृति, हमारी परंपरा और हमारे जीवन दर्शन के प्रतीक हैं। इन्हीं पवित्र पर्वों में से एक है - चैत्र नवरात्रि।
जिस प्रकार शारदीय नवरात्रि का महत्व है, उसी प्रकार चैत्र नवरात्रि का भी अपना विशेष स्थान है। यह केवल धार्मिक दृष्टि से ही नहीं, बल्कि वैज्ञानिक, सामाजिक और सांस्कृतिक दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। चैत्र नवरात्रि हिन्दू नववर्ष की शुरुआत का प्रतीक है। इसी दिन से विक्रम संवत का नया साल शुरू होता है। वर्ष 2026 में चैत्र नवरात्रि 19 मार्च से 27 मार्च तक है।
*नाम का अर्थ*
संस्कृत में दो शब्दों से मिलकर बना है - नव + रात्रि। नव का अर्थ है नौ और रात्रि का अर्थ है रातें। अर्थात नौ रातों तक चलने वाला व्रत और उत्सव। हिन्दू पंचांग के अनुसार साल में चार नवरात्रियां आती हैं: चैत्र नवरात्रि, आषाढ़ गुप्त नवरात्रि, शारदीय नवरात्रि और माघ गुप्त नवरात्रि। इनमें चैत्र और शारदीय नवरात्रि को प्रकट नवरात्रि कहा जाता है। चैत्र मास हिन्दू कैलेंडर का पहला महीना होता है। इसी मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से नवमी तक चैत्र नवरात्रि मनाई जाती है।
*पौराणिक कथाएं*
*1. सृष्टि निर्माण की कथा:* मान्यता है कि ब्रह्मा जी ने सृष्टि का निर्माण चैत्र शुक्ल प्रतिपदा के दिन ही शुरू किया था। इसलिए इस दिन को सृष्टि का पहला दिन माना जाता है और हिन्दू नववर्ष इसी दिन से शुरू होता है।
*2. महिषासुर वध की कथा:* महिषासुर एक शक्तिशाली असुर था जिसे वरदान था कि कोई देवता या पुरुष उसे नहीं मार सकता। उसके अत्याचार से तीनों लोक त्रस्त हो गए। तब सभी देवताओं ने मिलकर अपनी शक्तियों से माँ दुर्गा को प्रकट किया। माँ दुर्गा और महिषासुर के बीच नौ दिनों तक घोर युद्ध चला और दसवें दिन माँ ने उसका वध किया।
*3. भगवान राम की कथा:* रामायण के अनुसार, भगवान राम ने रावण से युद्ध करने से पहले चैत्र नवरात्रि में ही माँ शक्ति की आराधना की थी। 9 दिन तक उपवास रखकर उन्होंने विजय का आशीर्वाद माँगा था।
*4. राजा सुरथ की कथा:* मार्कंडेय पुराण में कथा है कि राजा सुरथ और समाधि नामक वैश्य ने मेधा ऋषि के आश्रम में माँ दुर्गा की आराधना की थी और तभी से नवरात्रि व्रत की परंपरा शुरू हुई।